पुष्पा हंस🎂
पुष्पा हंस🎂30 नवंबर 1917⚰️09 दिसंबर 2011
पुष्पा हंस
🎂30 नवंबर 1917
फाजिल्का , पंजाब , ब्रिटिश भारत
⚰️09 दिसंबर 2011 (आयु 94)
व्यवसाय
अभिनेता
पार्श्वगायक
के लिए जाना जाता है
हिंदी और पंजाबी गाने और फिल्में
जीवनसाथी
हंस राज चोपड़ा
अभिभावक)
रतन लाल कपूर
जनक रानी कपूर
पुरस्कार
पद्म श्री
पंजाबी भूषण पुरस्कार
कल्पना चावला उत्कृष्टता पुरस्कार
पार्श्वगायिका अभिनेत्री पुष्पा हंस की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
पुष्पा हंस कपूर (1917-2011) 1940 और 1950 के दशक में हिंदी और पंजाबी फिल्म उद्योगों की एक भारतीय पार्श्व गायिका और फिल्म अभिनेत्री थीं। उन्हें 1950 की हिंदी फिल्म, शीश महल और 1949 की फिल्म अपना देश में उनके अभिनय के लिए जाना जाता था उनको भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया गया
हंस का जन्म 30 नवंबर 1917 को ब्रिटिश भारत के पंजाब में फाजिल्का में एक वकील पिता के हुआ था उनके पिता का नाम रतन लाल कपूर और माता का नाम जनक रानी कपूर था था उनकी स्कूली शिक्षा फाजिल्का के स्थानीय स्कूल में हुई, जिसके बाद उन्होंने लाहौर के पटवर्धन घराने में शास्त्रीय संगीत की पढ़ाई की, जहाँ से उन्होंने संगीत में स्नातक किया उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के लाहौर स्टेशन पर अपना करियर शुरू किया और बाद में एक पार्श्व गायिका के रूप में फिल्म उद्योग में प्रवेश किया। बाद में, उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में भी अभिनय किया, विशेष रूप से प्रसिद्ध फिल्म निर्माता, वी शांताराम द्वारा निर्देशित हिंदी फिल्म अपना देश (1949) में
भारत सरकार ने 2007 में उन्हें सिनेमा में उनके योगदान के लिए भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया उसी वर्ष उन्हें दो और पुरस्कार मिले, पंजाबी भूषण पुरस्कार और कल्पना चावला उत्कृष्टता पुरस्कार।
पुष्पा हंस, जिन्होंने भारतीय सेना में एक कर्नल हंस राज चोपड़ा से शादी की थी,
9 दिसंबर 2011 को उनका निधन हो गया।
🎧
चैन किथां गुजरी सारी रात वे
सारी रात तेरा तकनी हा राह तारें तो पुच्छ चन्न वे
गल्लां दिलां दियां दिला विच रह गइयां, शिव कुमार बटालवी
चन्ना मेरी बह चढ़ दे
चुन्नी दा पल्ला
लुट्टी हीर वे फ़कीर दे
हिंदी गाने
चमन (1948) पंजाबी फ़िल्म
काले बादल (1950) (पंजाबी फिल्म)
अपना देश (1949) में मोहिनी देवी की भूमिका निभाई
आदमी वो है मुसिबत से परेशान न हो
बेदर्द ज़माना क्या जाने
भूले जमाने याद न कर याद न कर
दिल किसीसे लगाके देख लिया
दिल-ए-नादां तुझे क्या हुआ है
कोई उम्मीद बार नहीं आती
मेरी खुशियों के सवेरे की कभी शाम ना हो
तकदीर बनानेवाले ने कैसी तकदीर बनाई है
तोहे दिल की क़सम तोहे दिल की क़सम
तू माने या ना माने
तुम देख रहे हो कि सारे सहारे
🏆2007 में पद्मश्री
पंजाबी भूषण पुरस्कार
कल्पना चावला उत्कृष्टता पुरस्कार
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