किशोर साहू 🎂22 नवंबर 1915⚰️22 अगस्त 1980
🎬 किशोर साहू छत्तीसगढ़ का गौरव 🎬
22 नवंबर 1915, राजनांदगांव
मृत्यु की जगह और तारीख: 22 अगस्त 1980, बैंकॉक, थाईलैंड
किताबें: Meri Aatmakatha, मेरी आत्मकथा
बच्चे: नैना साहू, विमल साहू, ममता साहू, रोहित साहू
पोते या नाती: गौतम राव, सोलोमैन लैंडरमन, पवन साहू, डेनियल लैंडरमन
भारतीय सिनेमा के अग्रणी फिल्म निर्माताओं में से एक किशोर साहू को उनकी जयंती पर याद करते हुए: एक श्रद्धांजलि
किशोर साहू (22 नवंबर 1915 - 22 अगस्त 1980) एक भारतीय अभिनेता, फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और निर्माता थे। वे 1937 से 1980 के बीच 22 फिल्मों में दिखाई दिए। उन्होंने 1942 से 1974 के बीच 20 फिल्मों का निर्देशन किया।
किशोर साहू का जन्म 22 नवंबर 1915 को राजनांदगांव, रियासत, अविभाजित भारत में हुआ था, बाद में मध्य प्रदेश के दुर्ग जिले में, अब राजनांदगांव छत्तीसगढ़ का एक जिला है। किशोर साहू कन्हैयालाल साहू (काशी) और प्रेमवती साहू (मोहोबे) के पुत्र थे। उनके पिता रायगढ़ के राजा के अधीन प्रधानमंत्री थे। उन्होंने बी.ए. पास किया है। मॉरिस कॉलेज, नागपुर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और "स्वतंत्रता संग्राम" में भाग लिया, 1937 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। लघु कथाएँ लिखने में उनकी रुचि ने उन्हें सिनेमा के संपर्क में ला दिया। किशोर साहू ने बॉम्बे टॉकीज द्वारा निर्मित और फ्रांज ओस्टन द्वारा निर्देशित फिल्म "जीवन प्रभात" (1937) में एक अभिनेता के रूप में अपनी शुरुआत की। संगीत निर्देशक सरस्वती देवी थीं, गीत और संवाद जे.एस. कैश्याप द्वारा लिखे गए थे, पटकथा निरंजन पाल द्वारा लिखी गई थी। फिल्म की "स्टार वैल्यू" देविका रानी थीं। ऐसा कहा जाता है कि किशोर साहू को फिल्म में अभिनय के लिए एक भी पैसा नहीं दिया गया था और वे नागपुर वापस लौट आए। अपने करोड़पति मित्र द्वारका दास डागा की मदद से किशोर साहू ने 'द इंडिया आर्टिस्ट लिमिटेड' नाम से एक फिल्म कंपनी की स्थापना की और लोकप्रिय नायिका मिस रोज़ के साथ अपनी पहली फिल्म 'बहुरानी' बनाई। उसके बाद उनकी दूसरी फिल्म बॉम्बे टॉकीज के बैनर तले नायिका स्नेहप्रभा प्रधान के साथ 'पुनर्मिलन' थी। किशोर साहू द्वारा निर्देशित फिल्म 'कुवारा बाप' 1943 की सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए बीएफजेए - सर्वश्रेष्ठ भारतीय फिल्म पुरस्कार के विजेताओं में से एक थी। उनकी फिल्म 'राजा' मोशन पिक्चर्स में कला और कौशल का एक मील का पत्थर बनी हुई है। उनकी फिल्म 'वीर कुणाल' ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की। उन्होंने कामिनी कौशल के साथ दिलीप कुमार को 'नदिया के पार' में निर्देशित किया, जो 1948 की छठी सबसे अधिक कमाई करने वाली भारतीय फिल्म बन गई। उनकी 1954 की फिल्म 'मयूरपंख' ने 1954 के कान फिल्म महोत्सव में प्रवेश किया, जहां इसे महोत्सव के ग्रैंड पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया। "सावन आया रे" ने व्यावसायिक रूप से अच्छा प्रदर्शन किया और 1949 के मई संस्करण में फिल्मइंडिया के बाबूराव पटेल ने टिप्पणी की कि साहू का मूल्यांकन "अन्यथा साधारण" कहानी को दिए गए "मूल उपचार" के कारण बढ़ा था। उन्हें मीना कुमारी अभिनीत, "दिल अपना और प्रीत पराई" (1960) के लिए भी जाना जाता था। उन्हें "गाइड" (1965) में वहीदा रहमान के पति मार्को के रूप में उनके अभिनय के लिए सराहा गया। किशोर साहू की पत्नी प्रीति कुमाऊँनी ब्राह्मण थीं। उनके चार बच्चे थे, विमल साहू, नैना साहू, ममता साहू और रोहित साहू। उनका एक बेटा विक्की साहू जिसने बासु चटर्जी की खट्टा मीठा जैसी फिल्मों में साइड रोल किए। उनकी बेटी नैना साहू ने भी हिंदी फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने "हरे कांच की चूड़ियाँ" में मुख्य भूमिका निभाई। उनमें से किसी ने भी पिता किशोर साहू जितना अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। किशोर साहू की आखिरी फिल्म "वकील बाबू" थी, जो 22 अगस्त 1980 को उनकी मृत्यु के बाद रिलीज हुई थी। निर्देशक के तौर पर उनकी आखिरी फिल्म "धुएं की लकीर" है। "तीन बहुरानियां" उनकी लिखी आखिरी कहानी है। "पुष्पांजलि" फिल्म निर्माता के तौर पर उनकी आखिरी फिल्म थी। किशोर साहू का निधन 22 अगस्त 1980 को 64 साल की उम्र में बैंकॉक, थाईलैंड में हुआ था। छत्तीसगढ़ सरकार ने 24 मार्च 2018 को स्वर्गीय किशोर साहू की स्मृति में राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कारों की घोषणा की। इस तरह का पहला किशोर साहू स्मृति राष्ट्रीय पुरस्कार फिल्म निर्माता श्याम बेनेगल को दिया गया और राज्य स्तरीय पुरस्कार छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्देशक मनोज वर्मा को दिया गया।
किशोर साहू…एक शख्स जो 22 फिल्मों में बतौर एक्टर नजर आए। जिन्होंने 20 फिल्में बतौर डायरेक्टर बनाईं और साथ में प्रोड्यूसर और स्टोरी राइटर भी थे। इन्होंने साहित्य के क्षेत्र में भी काम किया था। करियर में जितने सफल, पर्सनल लाइफ में उतने ही अकेले। परिवार के मना करने के बावजूद किशोर साहू ने लव मैरिज की थी, पर उनकी ये शादी महज 4 महीने ही चल सकी। अपने काम को लेकर इतने सख्त रहते थे कि इनकी जिद के आगे कमाल अमरोही जैसे बड़े फिल्ममेकर तक को झुकना पड़ा था। किशोर को खुद के काम पर इतना भरोसा था कि इन्होंने अपनी उस फिल्म को भी रिलीज किया जिसे प्रोड्यूसर ने फ्लॉप होने का दावा किया था। इनकी फिल्म मयूरपंख को 1954 में कांस फिल्म फेस्टिवल में शामिल किया गया था। इन्होंने फिल्म नदिया के पार को डायरेक्ट किया था जिसमें दिलीप कुमार और कामिनी कौशल नजर आईं थीं।किशोर साहू का जन्म 22 नवंबर 1915 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में हुआ था। स्कूली पढ़ाई करने के साथ ही इन्होंने नाटकों में भी काम करना शुरू कर दिया था। नाटकों में काम करने के दौरान ही इनके मन में फिल्मों में एक्टिंग करने का भी खुमार चढ़ गया था। किशोर साहू ने साहित्य लिखने में भी महारत हासिल कर रखी थी। इनके पिता भी एक लेखक थे और अपने पिता से इंस्पायर होकर इन्होंने लिखना शुरू किया था। नाटकों में एक्टिंग करने के अलावा कई नाटक की कहानियों को भी किशोर साहू ने लिखा था।
कॉलेज की पढ़ाई खत्म करने के बाद किशोर साहू ने थिएटर ग्रुप में करियर बनाने का सोचा, पर इसी बीच उनके दोस्त ने उन्हें मुंबई जाकर फिल्मों में काम करने का सुझाव दिया। दोस्त के सुझाव पर किशोर साहू मुंबई आ गए और यहां उन्होंने फिल्मों में काम करने के लिए संघर्ष करना शुरू कर दिया।इसी दौरान किशोर साहू की मुलाकात अशोक कुमार से हुई। किशोर साहू की एक्टिंग की समझ से प्रभावित होकर अशोक कुमार ने बाॅम्बे टॉकीज के मालिक हिमांशु राय से उनकी मुलाकात करवाई। इसके बाद किशोर साहू की मानो किस्मत ही बदल गई। हिमांशु राय ने बतौर लीड एक्टर अपनी फिल्म जीवन प्रभात में किशोर साहू को कास्ट किया था। इस फिल्म में उनके साथ हिंमाशु की पत्नी और इंडस्ट्री की पहली फीमेल सुपरस्टार देविका रानी भी लीड रोल में थीं। किशोर साहू की पहली ही फिल्म बाॅक्स आफिस पर हिट हो गई थी। उनकी ये फिल्म तो हिट हो गई, पर वो अपनी इस सफलता से खुश नहीं थे। किशोर साहू चाहते थे कि फिल्मों में वो अपने हिसाब से चीजों को दिखा सकें और ऐसा तभी हो सकता था जब वो फिल्मों को खुद डायरेक्ट करें। हालांकि ऐसा करना भी उनके लिए आसान नहीं था क्योंकि फिल्में बनाने में बड़ी लागत लगती है और उस समय उनके पास इतना पैसा नहीं था।
दोस्त के साथ मिलकर बनाई खुद की प्रोडक्शन कंपनी
इसी कारण किशोर साहू वापस लौटकर नागपुर चले गए और लेखन के काम में जुट गए। जब ये बात उनके दोस्त द्वारका दास डागा को पता चली तो उन्होंने किशोर से मुलाकात की। द्वारका दास का लाखों का बिजनेस था और वो किशोर साहू की प्रतिभा को जानते थे, इसलिए वो किशोर साहू के साथ मिलकर प्रोडक्शन कंपनी खोलने को राजी हो गए। दोनों की साझेदारी से इंडिया आर्टिस्ट लिमिटेड कंपनी की शुरुआत हुई।इस कंपनी के बैनर तले किशोर साहू ने पहली फिल्म बहुरानी बनाई थी। ये फिल्म अनूप लाल मंडल के उपन्यास मिमांसा पर बेस्ड थी और ये अपने समय की क्रांतिकारी फिल्म साबित हुई थी। 20 जून 1940 को एक्सेल्सियर थिएटर मुंबई में फिल्म बहुरानी का प्रीमियर रखा गया था। इस कार्यक्रम में दादा साहब फाल्के समेत कई नामी हस्तियां शामिल हुईं थीं। इसी कार्यक्रम में एक्ट्रेस स्नेहप्रभा प्रधान भी आई थीं। इसके बाद देविका रानी ने फिल्म पुनर्मिलन में बतौर लीड एक्टर किशोर साहू को कास्ट किया और स्नेहप्रभा को एक्ट्रेस के रोल के लिए कास्ट किया।
परिवार के मना करने के बाद भी की थी स्नेहप्रभा से शादी
इसी बीच किशोर साहू बीमार पड़ गए और स्नेहप्रभा ने उनके घर जाकर उनकी बहुत सेवा की। किशोर साहू को स्नेहप्रभा का ये स्नेह देखकर उनसे प्यार हो गया और 13 सितंबर 1940 को मुंबई के रजिस्ट्रार ऑफिस में दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली। किशोर साहू का परिवार और दोस्त इस शादी के खिलाफ थे, पर वो नहीं माने थे। अगले दिन पूरे देश में दोनों की शादी की चर्चा थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही किशोर साहू को लगने लगा था कि ये शादी बेमेल है।
लव मैरिज की, पर महज 4 महीने ही चली शादी
21 दिसंबर 1940 को पुनर्मिलन रिलीज हुई और ये सुपरहिट भी रही। स्नेहप्रभा के बुरे बर्ताव के कारण किशोर का कोई भी दोस्त उनके घर नहीं आना चाहता था और उनका परिवार भी उन्हें छोड़कर चला गया। इन सब चीजों के कारण वो मानसिक तनाव में रहने लगे। एक दिन तो दोनों में झगड़ा इतना बढ़ गया कि किशोर साहू घर छोड़कर चले गए और फिर कभी वो स्नेहप्रभा के पास वापस नहीं आए। उन दोनों की शादी अपने समय की चर्चित शादियों में से एक थी, फिर भी ये महज 4 महीने से ज्यादा नहीं चल सकी।
फिल्म में बतौर लीड एक्टर किशोर साहू को कास्ट करना चाहती थीं मीना कुमारी
1958 में कमाल अमरोही, राजकुमार और मीना कुमारी के साथ मिलकर फिल्म दिल अपना और प्रीत पराई बनाने की सोच रहे थे। कमाल चाहते थे कि इस फिल्म को किशोर साहू डायरेक्ट करें। किशोर इस फिल्म में राजकुमार की जगह दिलीप कुमार को लीड एक्टर के लिए कास्ट करना चाहते थे। सबसे खास बात तो ये थी कि मीना कुमारी बतौर लीड एक्टर फिल्म में किशोर साहू को कास्ट करना चाहती थीं। कमाल अपनी बातों पर अडिग रहे और फिल्म की मेकिंग 20 जून 1958 को शुरू हुई और 1959 में फिल्म बनकर तैयार हो गई। रिलीज करने से पहले इस फिल्म का एक ट्रायल शो रखा गया था। ये फिल्म सबको पसंद आई पर कमाल अमरोही को बिल्कुल पसंद नहीं आई।कमाल अमरोही चाहते थे कि फिल्म के कुछ सीन और कहानी में बदलाव किए जाएं, पर किशोर अपनी फिल्म में कोई भी बदलाव नहीं चाहते थे। इस वजह से फिल्म कई दिनों तक रिलीज नहीं की गई। आखिरकार किसी तरह के. आसिफ के कहने पर ये फिल्म रिलीज की गई, लेकिन रिलीज होने से पहले कमाल अमरोही ने बतौर प्रोड्यूसर अपना नाम हटवा लिया और मीना कुमारी का नाम उनकी जगह लिखा गया। इसके अलावा कमाल अमरोही ने ये भी कहा था कि अगर ये फिल्म हिट हुई तो वो किशोर साहू को कार गिफ्ट करेंगे। फिल्म रिलीज भी हुई और सुपरहिट भी रही, पर उन्होंने कभी भी किशोर साहू को कार गिफ्ट नहीं की।
हेलमेट', 'कालीघटा', 'साजन', 'सिंदूर', नदिया के पार और 'वीर कुणाल' जैसी 20 फिल्मों को किशोर साहू ने डायरेक्ट किया। फिल्म गाइड में किशोर साहू की एक्टिंग को शायद ही कोई भूल पाया हो। इस नायाब कलाकार का 22 अगस्त 1980.को हार्ट अटैक से निधन हो गया था।
🎥फिल्मोग्राफी: एक अभिनेता के रूप में - 1982 वकील बाबू
1971 हरे रामा हरे कृष्णा जुआरी
1970 पुष्पांजलि
1969 बेटी
1965 गाइड और पूनम की रात
1960 काला बाजार और लव इन शिमला
1958 काला पानी
1957 बड़े सरकार
1954 हैमलेट और मयूरपंख
1952 हमारी दुनिया, सपना और ज़लज़ला
1951 बज़ दिल और काली घटा
1949 नमूना, रिमझिम और सावन आया रे
1947 सिन्दूर
1945 वीर कुणाल
1944 इंसान
1943 शरारत और राजा
1942 कुंवारा बाप
1940 बहुरानी और पुनर्मिलन
1937 जीवन प्रभात
🎬 निर्देशक के रूप में -
1974 धुएं की लकीर
1970 पुष्पांजलि
1967 हरे कांच की चूड़ियां
1965 पूनम की रात
1963 घर बसाके देखो गृहस्थी
1960 दिल अपना और प्रीत पराई 1957 बड़े सरकार
1956 किस्मत का खेल
1954 हैमलेट और मयूरपंख
1951 काली घटा
1949 सावन आया रे
1948 नदिया के पार
1947 साजन और सिन्दूर
1945 वीर कुणाल
1944 शरारत
1943 राजा
1942 कुंवारा बाप
✍️एक लेखक के रूप में -
1977 अपनापन : पटकथा, कहानी, संवाद
1970 पुष्पांजलि : पटकथा, कहानी, संवाद
1968 तीन बहुरानियां : लेखक
1967 औरत: संवाद लेखक हरे कांच की चूड़ियां: संवाद पटकथा और कहानीकार 1960 दिल अपना और प्रीत पराई: लेखक
1954 मयूरपंख: पटकथा
🎬 निर्माता के रूप में -
1970 पुष्पांजलि
1967 हरे कांच की चूड़ियां
1965 पूनम की रात
1954 मयूरपंख
1951 काली घटा
1950 हमारा घर
1949 सावन आया रे
1940 बहुरानी,
Comments
Post a Comment