शशधर मुखर्जी (मृत्यु)

शशधर मुखर्जी 🎂29 सितंबर 1909⚰️03 नवंबर 1990
 शशधर मुखर्जी 
29 सितंबर 1909, झाँसी
मृत्यु की जगह और तारीख: 03 नवंबर 1990, मुम्बई
बच्चे: शोमू मुखर्जी, देब मुखर्जी, जॉय मुखर्जी, रोनो मुखर्जी · ज़्यादा देखें
पत्नी: सती रानी देवी (विवा. ?–1990)
भाई: रविन्द्रमोहन मुखर्जी, सुबोध मुखर्जी, प्रबोध मुखर्जी
पोते या नाती: काजोल, तनिशा मुखर्जी, अयान
शशधर मुखर्जी (29 सितंबर 1909 - 03 नवंबर 1990) हिंदी फिल्मों के एक प्रसिद्ध निर्माता थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1930 के दशक में बॉम्बे टॉकीज़ से की और बाद में राय बहादुर चुन्नीलाल, अशोक कुमार और ज्ञान मुखर्जी के साथ 1943 में फिल्मिस्तान स्टूडियो की स्थापना की। 1950 के दशक में उन्होंने अपना खुद का स्टूडियो, फिल्मालाया स्थापित किया। वह फिल्मों जैसे दिल देके देखो (1959), लव इन सिमला (1960), एक मुसाफिर एक हसीना (1962) और लीडर (1964) के लिए जाने जाते हैं।

उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड फॉर बेस्ट फिल्म के लिए जगृति (1954) के लिए सम्मानित किया गया और बाद में 1967 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

शशधर मुखर्जी का जन्म 29 सितंबर 1909 को झांसी, ग्वालियर राज्य, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वह अशोक कुमार, अनूप कुमार और किशोर कुमार के साले थे, जिनकी बहन सती रानी से उनका विवाह हुआ था। वह अशोक कुमार को फिल्मों में लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उनके बच्चे रोनो मुखर्जी, जॉय मुखर्जी, देब मुखर्जी, शोमू मुखर्जी, शिबानी मौलिक नée मुखर्जी और सुबीर मुखर्जी हैं। शोमू ने अभिनेत्री तनुजा से विवाह किया और उनके दो बच्चे काजोल और तनिशा हैं। शशधर की परनाती अभिनेत्री रानी मुखर्जी हैं, जिनके दादा रवींद्रमोहन मुखर्जी शशधर के बड़े भाई थे।

उनके दो और भाई, फिल्म निर्देशक सुबोध मुखर्जी और फिल्म निर्माता प्रबोध मुखर्जी थे। उनके पोते, देब मुखर्जी के बेटे आयन मुखर्जी ने फिल्म "ये जवानी है दीवानी" (2013) का निर्देशन किया।

फिल्मिस्तान में उनकी पहली फिल्म "चल चल रे नौजवान" थी, जिसमें नसीम बानो और अशोक कुमार ने अभिनय किया था। सदत हसन मंटो, इस्मत चुगताई, पंडित प्रदीप और कई अन्य प्रतिभाशाली लोग फिल्मिस्तान से जुड़े हुए थे। फिल्मिस्तान ने शम्मी कपूर, देव आनंद और कई अन्य कलाकारों को मौका दिया और उन्हें स्टार बनाया।

शशधर मुखर्जी का निधन 03 नवंबर 1990 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था। फिल्मालाया स्टूडियो के संस्थापक के रूप में, फिल्म "पथ्थर के इंसान" (1990) को शशधर मुखर्जी की याद में समर्पित किया गया था।

शशधर मुखर्जी की फिल्मोग्राफी:
माफ़ कीजिये, मैं आपको शशधर मुखर्जी की पूरी फिल्मोग्राफी प्रदान करने का प्रयास करता हूँ:

फिल्मोग्राफी:

1. कंगन (1939) - पटकथा लेखक और निर्माता
2. बंधन (1940) - कहानी लेखक
3. झूला (1941) - निर्माता
4. नया संसार (1941) - निर्माता
5. किस्मत (1943) - निर्माता
6. जगृति (1954) - निर्माता
7. मुनिमजी (1955) - निर्माता
8. तुमसा नहीं देखा (1957) - निर्माता
9. पेइंग गेस्ट (1957) - प्रस्तुति निर्माता
10. दिल देके देखो (1959) - निर्माता
11. लव इन सिमला (1960) - निर्माता
12. हम हिंदुस्तानी (1960) - निर्माता
13. एक मुसाफिर एक हसीना (1962) - निर्माता
14. लीडर (1964) - निर्माता
15. आओ प्यार करें (1964) - निर्माता
16. तू ही मेरी ज़िंदगी (1965) - निर्माता
17. संबंध (1966) - निर्माता
18. पत्थर के इंसान (1990) - समर्पित

अन्य जानकारी:

शशधर मुखर्जी ने फिल्मिस्तान स्टूडियो की स्थापना की और कई सफल फिल्मों का निर्माण किया। उन्होंने अपने बेटे जॉय मुखर्जी को फिल्मों में लॉन्च किया और कई अन्य कलाकारों को मौका दिया। वह एक प्रतिभाशाली निर्माता और पटकथा लेखक थे जिन्होंने हिंदी सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।फ़िल्मालय स्टूडियो के संस्थापक के रूप में, 1990 की फ़िल्म पत्थर के इंसान , शशधर मुखर्जी की स्मृति को समर्पित थी।पद्म श्री , भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान (1967)में दिया गया

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