मुनव्वर सुल्ताना (जनम)
मुनावर सुल्ताना🎂08 नवंबर 1924⚰️15 सितंबर 2007,
फ़िल्म अभिनेत्री मुनव्वर सुल्ताना की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
🎂जन्म : 08 नवंबर 1924, पाकिस्तान लाहौर
⚰️मृत्यु : 15 सितंबर 2007, पालीहिल , मुंबई
मुनव्वर सुल्ताना एक भारतीय सिनेमा अभिनेत्री थीं, जिन्होंने हिंदी / हिंदुस्तानी फिल्मों में अभिनय किया था। उन्हें 1940 के दशक के उत्तरार्ध में "नूरजहाँ, स्वर्णलता और रागिनी" जैसी अभिनेत्रियों के साथ शुमार किया जाता है।
वह मजहर खान की फ़िल्म पहली नज़र (1945) से अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत की मुनव्वर सुल्ताना अभिनेता-निर्माता-निर्देशक मज़हर खान की खोज, थी वह 1949 तक सबसे व्यस्त अभिनेत्रियों में से एक बन गई, साथ ही अन्य प्रमुख अभिनेत्रियों जैसे कि सुरैया और नरगिस के साथ उनका नाम लिया जाने लगा
उनकी कुछ सफल फिल्में पहली नज़र, दर्द (1947), एलान (1947) कनीज़ (1947) और बाबुल (1950) थीं।
मुनव्वर सुल्ताना का जन्म 8 नवंबर 1924 को लाहौर, ब्रिटिश भारत में एक सख्त पंजाबी मुस्लिम परिवार में हुआ था पुत्र सरफराज और बेटी शाहीन के साक्षात्कार के अनुसार, मुनव्वर के पिता एक रेडियो उद्घोषक थे मुनव्वर एक डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन फिल्मों में एक प्रस्ताव ने उन्हें अभिनेत्री बना दिया दलसुख पंचोली की फ़िल्म खजांची (1941) में उन्होंने बारमैड कि एक छोटी सी भूमिका निभाई थी और उन पर एक गीत "पीने के दिन आये" फिल्माया गया था मुनव्वर 1945 में अभिनेता-निर्देशक मज़हर खान के कहने से लाहौर से बॉम्बे आयी थी । वह अपनी फिल्म पहली नज़र के साथ ही लोकप्रिय हो गयी।1945 में, उन्हें निर्माता-अभिनेता-निर्देशक मज़हर खान ने लाहौर का दौरा किया वहाँ उन्होने मुनव्वर सुल्ताना को 4000 मासिक वेतन पर बॉम्बे ले आये मजहर के साथ मुनव्वर की पहली फिल्म पहली नज़र थी, जहाँ उन्होंने अभिनेता मोतीलाल के साथ काम किया था मोतीलाल के लिए गायक मुकेश द्वारा गाए गीत "दिल जलता है तो जलने दे " काफी लोकप्रिय हुआ इस फ़िल्म के दौरान मज़हर खान मुनव्वर सुल्ताना की नज़दीकियों काफी बढ़ गयी
पहली नज़र के बाद, उन्हें 1947 से 1949 तक कई फिल्मों में काम किया बाबूराव पटेल ने सिने-पत्रिका फिल्मइंडिया 1949 में उनके बारे में लिखा की सुरैया और नरगिस के बाद मुनव्वर सुल्ताना सबसे अधिक काम करने वाली अभिनेत्रियों में से एक थीं
1947 में, मुनव्वर ने चार फिल्मों दर्द, एलान, अंधों की दुनीया और नैय्या में अभिनय किया। कारदार प्रोडक्शंस के तहत दर्द को अब्दुल रशीद कारदार ने निर्देशित किया था। फिल्म में कोई बड़ा कलाकार नहीं होने के बावजूद, यह बॉक्स ऑफिस पर एक आश्चर्यजनक "संगीतमय हिट" निकली फ़िल्म के नायक कारदार के भाई नुसरत (कारदार) थे, जबकि सुरैया ने मुख्य नायिका के रूप में मुनव्वर सुल्ताना के साथ दूसरी मुख्य भूमिका निभाई थी मुनव्वर सुल्ताना पर तीन गाने फिलामये गये जिसे उमा देवी ने गाया था "अफसाना लख रही हूं" गीत बहुत लोकप्रिय हुआ
फिल्म "एलान" ने मुनव्वर सुलताना को और अधिक लोकप्रिय बना दिया एक मुस्लिम सामाजिक, फिल्म को शिक्षा की आवश्यकता के प्रति अपने "प्रगतिशील रवैये" के लिए सराहा गया। इसका निर्देशन महबूब खान ने किया था और सुरेंद्र ने नायक की भूमिका निभाई थी
1948 में मुनव्वर को चार और फिल्मों में में काम किया "पराई आग" को ग्रेट इंडिया पिक्चर्स बैनर तले और नजम नकवी द्वारा निर्देशित किया गया था फिल्म में मुनव्वर के साथ मधुबाला और उल्हास थे
"सोना" (गोल्ड) मजहर कला प्रोडक्शन लि के तहत सोना
मजहर खान द्वारा निर्देशित फिल्म थी
बॉम्बे टॉकीज प्रोडक्शन के बैनर तले नज़ीर अजमेरी द्वारा निर्देशित "मजबूर" एक और फ़िल्म थी इसमें श्याम इनके साथ नायक की भूमिका में थे इस फ़िल्म में गुलाम हैदर का संगीत था बॉम्बे टॉकीज़ हिमांशु राय की मृत्यु के बाद कई बदलावों से गुज़रा और एस मुखर्जी के साथ देविका रानी की साझेदारी ने बॉक्स ऑफिस पर कई हिट फ़िल्में दी पहले एस मुखर्जी और फिर देविका रानी ने बॉम्बे टॉकीज़ को छोड़ दिया, अशोक कुमार और एस वाचा ने बॉम्बे टॉकीज़ को अपने नियंत्रण में लिया उनकी पहली फिल्म "मजबूर" थी यह कहानी एक "अंतर-सांप्रदायिक" प्रेम कहानी थी, जिसमें एक मुस्लिम लड़के एक हिंदू लड़की का प्यार दिखाया गया था मुनव्वर ने इस फिल्म में श्याम के साथ "हिट-जोड़ी" बनाई, जबकि लता मंगेशकर ने गुलाम हैदर के संगीत निर्देशन में कई बेहतरीन गाने गाये
"मेरी कहानी" को कैमरामैन केकी मिस्त्री द्वारा निर्देशित किया गया था और सुपर टीम फेडरल प्रोडक्शंस (बॉम्बे) के लिए शराफ द्वारा निर्मित किया गया था फिल्म में सुरेंद्र के साथ मुनव्वर और मधुबाला ने अभिनय किया था
1949 सात रिलीज के साथ मुनव्वर का सबसे व्यस्त वर्ष रहा फ़िल्म "दिल की दुनीया" को नोबल आर्ट्स प्रोडक्शन के लिए मजहर खान द्वारा निर्देशित किया गया था इस फ़िल्म में मुनव्वर के साथ गीता बाली और मज़हर की सह-भूमिका निभाई फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई
उस साल उनकी स्टैंडआउट फिल्म थी "कनीज़", जिसका निर्देशन कृष्ण कुमार ने कारवां पिक्चर्स के लिए किया था इसमें श्याम के साथ मुनव्वर और कुलदीप कौर सहकलाकार थे
1950 में रिलीज़ उनकी चार फिल्मों में से, मुनव्वर की सबसे उल्लेखनीय फिल्म "बाबुल" थी उन्होंने इस प्रेम त्रिकोण में दिलीप कुमार और नरगिस के साथ अभिनय किया फ़िल्म एस यू सनी द्वारा निर्देशित नौशाद द्वारा संगीतबद्ध किया गया था फिल्म बॉक्स ऑफिस मेगा हिट साबित हुई उन्होंने 1956 तक कुछ और फिल्मों में अभिनय किया फ़िल्म "जल्लाद" उनकी अंतिम फ़िल्म थी
1950 से, मुनव्वर का कैरियर धीमा हो गया, और उन्होंने कम फिल्मों में अभिनय किया वह अपने पति शरीफ अली भगत से मिली, जो एक व्यवसायी थे, एक फिल्म के सेट पर जिसके लिए उन्होंने फर्नीचर प्रदान किया था उन्होंने मुनव्वर के साथ दो फिल्में, मेरी कहानी (1948) और प्यार की मंजिल (1950) का निर्माण किया
1966 में अपने पति की आकस्मिक मृत्यु के बाद, मुनव्वर ने अपने चार बेटों और तीन बेटियों के परिवार को अकेले संभाला
अपने जीवन के अंतिम आठ वर्षों में, मुनव्वर अल्जाइमर रोग से पीड़ित रहे 15 सितंबर 2007 को अंबेडकर रोड स्थित पॉली हिल मुम्बई में उनके घर पर उनका निधन हो गया
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1941 खजांची '
1945 पहली नज़र
1947 अंधों की दुनिया
1947 दर्द
1947 एलान
1947 नैया
1948 मजबूर
1948 मेरी कहानी
1948 पराई आग
1948 सोना उर्फ गोल्ड
1949 बापू
1949 दिल की दुनिया
1949 कनीज़
1949 निस्बत
1949 रात की रानी
1949 सावन भादो
1949 उद्धार
1950 बाबुल
1950 प्यार की मंजिल
1950 सबक
1950 सरताज
1952 अपनी इज्जत
1952 तरंग
1954 एहसान
1954 तूफान
1954 वतन
1955 दीवार
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