संजीव कुमार(मृत्यु)


संजीव कुमार 🎂जन्म 09 जुलाई, 1938⚰️मृत्यु 06 नवम्बर 1985
संजीव कुमार 
पूरा नाम हरिभाई जरीवाल
प्रसिद्ध नाम संजीव कुमार
अन्य नाम हरिभाई
🎂जन्म 09 जुलाई, 1938
जन्म भूमि मुंबई, महाराष्ट्र
⚰️मृत्यु 06 नवम्बर 1985
मृत्यु स्थान मुंबई
पति/पत्नी आजीवन कुंवारे रहे
कर्म भूमि मुंबई
कर्म-क्षेत्र अभिनेता
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  संजीव कुमार
पुराना नाम हरिभाई जरीवाल।

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मुख्य फ़िल्में 'दस्तक' (1970), 'कोशिश' (1972), 'सीता और गीता' (1972), 'शोले' (1975), 'आँधी' (1976), 'अर्जुन पंडित' (1977) आदि
पुरस्कार-उपाधि दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार व दो बार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार।
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हिन्दी फ़िल्मों के भारतीय अभिनेता थे। इनका नाम हरिभाई जरीवाल था, लेकिन फ़िल्मी दुनिया में ये अपने दूसरे नाम 'संजीव कुमार' के नाम से प्रसिद्ध हैं। फ़िल्मी दुनिया में संजीव कुमार ने नायक, सहनायक, खलनायक और चरित्र कलाकार की भूमिकाओं को निभाया। इनके द्वारा अभिनीत प्रसिद्ध फ़िल्मों में 'कोशिश', 'शोले', 'अंगूर', 'त्रिशूल', 'पारस', 'अनामिका', 'खिलौना', 'मनचली', 'शतरंज के खिलाड़ी', 'सीता और गीता', 'आंधी', 'मौसम', 'विधाता', 'दस्तक', 'नया दिन नयी रात' आदि हैं।

जीवन परिचय
संजीव कुमार का जन्म मुंबई में 9 जुलाई, 1938 को एक मध्यम वर्गीय गुजराती परिवार में हुआ था। वह बचपन से ही फ़िल्मों में बतौर अभिनेता काम करने का सपना देखा करते थे। इसी सपने को पूरा करने के लिए वह अपने जीवन के शुरुआती दौर में रंगमंच से जुड़े और बाद में उन्होंने फ़िल्मालय के एक्टिंग स्कूल में दाख़िला लिया। इसी दौरान वर्ष 1960 में उन्हें फ़िल्मालय बैनर की फ़िल्म 'हम हिन्दुस्तानी' में एक छोटी सी भूमिका निभाने का मौक़ा मिला।

फ़िल्मी सफ़र
वर्ष 1962 में राजश्री प्रोडक्शन की निर्मित फ़िल्म 'आरती' के लिए उन्होंने स्क्रीन टेस्ट दिया, जिसमें वह पास नहीं हो सके। सर्वप्रथम मुख्य अभिनेता के रूप में संजीव कुमार को वर्ष 1965 में प्रदर्शित फ़िल्म 'निशान' में काम करने का मौक़ा मिला। वर्ष 1960 से वर्ष 1968 तक संजीव कुमार फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहे। फ़िल्म 'हम हिंदुस्तानी' के बाद उन्हें जो भी भूमिका मिली, वह उसे स्वीकार करते चले गए। इस बीच उन्होंने 'स्मगलर', 'पति-पत्नी', 'हुस्न और इश्क', 'बादल', 'नौनिहाल' और 'गुनाहगार' जैसी कई फ़िल्मों में अभिनय किया लेकिन इनमें से कोई भी फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हुई।

सहायक अभिनेता
वर्ष 1968 में प्रदर्शित फ़िल्म 'शिकार' में वह पुलिस ऑफिसर की भूमिका में दिखाई दिए। यह फ़िल्म पूरी तरह अभिनेता धर्मेन्द्र पर केन्द्रित थी, फिर भी संजीव कुमार धर्मेन्द्र जैसे अभिनेता की उपस्थिति में अपने अभिनय की छाप छोड़ने में कामयाब रहे। इस फ़िल्म में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें सहायक अभिनेता का 'फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड' भी मिला।

अभिनय
वर्ष 1968 में प्रदर्शित फ़िल्म 'संघर्ष' में उनके सामने हिन्दी फ़िल्म जगत के अभिनय सम्राट दिलीप कुमार थे लेकिन संजीव कुमार अपनी छोटी सी भूमिका के जरिए दर्शकों में प्रसिद्ध रहे। इसके बाद 'आशीर्वाद', 'राजा और रंक', 'सत्यकाम' और 'अनोखी रात' जैसी फ़िल्मों में मिली कामयाबी के जरिए संजीव कुमार दर्शकों के बीच अपने अभिनय की धाक जमाते हुए ऐसी स्थिति में पहुंच गए जहां वह फ़िल्म में अपनी भूमिका स्वयं चुन सकते थे। वर्ष 1970 में प्रदर्शित फ़िल्म 'खिलौना' की जबर्दस्त कामयाबी के बाद संजीव कुमार बतौर अभिनेता अपनी अलग पहचान बना ली।

सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार
वर्ष 1970 में ही प्रदर्शित फ़िल्म 'दस्तक' में उनके लाजवाब अभिनय के लिए वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के 'राष्ट्रीय पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। वर्ष 1972 में प्रदर्शित फ़िल्म 'कोशिश' में उनके अभिनय का नया आयाम दर्शकों को देखने को मिला। फ़िल्म 'कोशिश' में संजीव कुमार ने गूंगे की भूमिका निभायी। बगैर संवाद बोले सिर्फ आंखों और चेहरे के भाव से दर्शकों को सब कुछ बता देना संजीव कुमार की अभिनय प्रतिभा का ऐसा उदाहरण था, जिसे शायद ही कोई अभिनेता दोहरा पाए।

फ़िल्म 'कोशिश' में संजीव कुमार अपने लड़के की शादी एक गूंगी लड़की से करना चाहते है और उनका लड़का इस शादी के लिए राजी नहीं होता है। तब वह अपनी मृत पत्नी की दीवार पर लटकी फ़ोटो को उतार लेते हैं। उनकी आंखों में विषाद की गहरी छाया और चेहरे पर क्रोध होता है। इस दृश्य के जरिए उन्होंने बिना बोले ही अपने मन की सारी बात दर्शकों तक बडे़ ही सरल अंदाज़में पहुंचा दी थी। इस फ़िल्म में उनके लाजवाब अभिनय के लिए उन्हें दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया।

फ़िल्मों की कामयाबी
'खिलौना', 'दस्तक' और 'कोशिश' जैसी फ़िल्मों की कामयाबी से संजीव कुमार शोहरत की बुंलदियों पर जा बैठे। अपनी फ़िल्मों की कामयाबी के बाद भी उन्होंने फ़िल्म 'परिचय' में एक छोटी सी भूमिका स्वीकार की और उससे भी वह दर्शकों का दिल जीतने में सफल रहे। इस बीच 'सीता और गीता', 'अनामिका' और 'मनचली' जैसी फ़िल्मों में अपने रूमानी अंदाज़के जरिए दर्शकों के बीच प्रसिद्ध रहे।

फ़िल्म नया दिन नयी रात
वर्ष 1974 में प्रदर्शित फ़िल्म 'नया दिन नयी रात' में संजीव कुमार के अभिनय और विविधता के नए आयाम दर्शकों को देखने को मिले इस फ़िल्म में उन्होंने नौ अलग-अलग भूमिकाओं में अपने अभिनय की छाप छोड़ी। फ़िल्म में संजीव कुमार ने लूले-लंगड़े, अंधे, बूढे, बीमार, कोढ़ी, हिजड़े, डाकू, जवान और प्रोफ़ेसर के किरदार को निभाकर जीवन के नौ रसो को रूपहले पर्दे पर साकार किया। यह फ़िल्म उनके हर किरदार की अलग ख़ासियत की वजह से जानी जाती है लेकिन इस फ़िल्म में उनके एक हिजड़े का किरदार आज भी फ़िल्मी दर्शकों के मस्तिष्क पर छा जाता है।
विभिन्न भूमिकाएँ
अभिनय में एकरूपता से बचने और स्वंय को चरित्र अभिनेता के रूप में भी स्थापित करने के लिए संजीव कुमार ने अपने को विभिन्न भूमिकाओं में पेश किया। इस क्रम में वर्ष 1975 में प्रदर्शित रमेश सिप्पी की सुपरहिट फ़िल्म शोले में वह फ़िल्म अभिनेत्री जया भादुड़ी के ससुर की भूमिका निभाने से भी नहीं हिचके। हांलाकि संजीव कुमार ने फ़िल्म शोले के पहले जया भादुडी के साथ 'कोशिश' और 'अनामिका' में नायक की भूमिका निभाई थी। वर्ष 1977 में प्रदर्शित फ़िल्म 'शतरंज के खिलाड़ी' में उन्हें महान् निर्देशक सत्यजीत रे के साथ काम करने का मौक़ा मिला। इस फ़िल्म के जरिए भी उन्होंने दर्शकों का मन मोहे रखा। इसके बाद संजीव कुमार ने 'मुक्ति' (1977), त्रिशूल (1978), 'पति पत्नी और वो' (1978), 'देवता' (1978), 'जानी दुश्मन' (1979), 'गृहप्रवेश' (1979), 'हम पांच' (1980), 'चेहरे पे चेहरा' (1981), 'दासी' (1981), 'विधाता' (1982), 'नमकीन' (1982), 'अंगूर' (1982) और 'हीरो' (1983) जैसी कई सुपरहिट फ़िल्मों के जरिए दर्शकों के दिल पर राज किया।

बहुआयामी कलाकार
भारतीय सिनेमा जगत में संजीव कुमार को एक ऐसे बहुआयामी कलाकार के तौर पर जाना जाता है जिन्होंने नायक, सहनायक, खलनायक और चरित्र कलाकार भूमिकाओं से दर्शकों को अपना दीवाना बनाया। संजीव कुमार के अभिनय में एक विशेषता रही कि वह किसी भी तरह की भूमिका के लिए सदा उपयुक्त रहते थे। बाद में संजीव कुमार ने गुलज़ार के निर्देशन मे 'आंधी', 'मौसम', 'नमकीन' और 'अंगूर' जैसी कई फ़िल्मों में अपने अभिनय का जौहर दिखाया। वर्ष 1982 में प्रदर्शित फ़िल्म अंगूर में संजीव कुमार ने दोहरी भूमिका निभाई।

सम्मान और पुरस्कार
संजीव कुमार को दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए हैं। वर्ष 1975 में प्रदर्शित फ़िल्म 'आंधी' के लिए सबसे पहले उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार दिया गया। इसके बाद वर्ष 1976 में भी फ़िल्म 'अर्जुन पंडित' में बेमिसाल अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार से नवाजे गए।

मृत्यु
अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिल में ख़ास पहचान बनाने वाले शानदार कलाकार 6 नवंबर 1985 को दिल का गंभीर दौरा पड़ने के कारण इस दुनिया को अलविदा कह गए।
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शायद आप नहीं जानते होंगे फिल्म 'शोले' में संजीव कुमार ने जो ठाकुर का रोल निभाया था उसे धर्मेन्द्र करना चाहते थे। उस समय हेमा मालिनी के प्यार के दीवाने दो एक्टर्स थे एक तो धर्मेन्द्र और दूसरे संजीव कुमार। फिल्म निर्देशक रमेश सिप्पी उलझन में पड़ गए। रमेश सिप्पी ने धर्मेन्द्र से कहा कि तुम्हें वीरू का रोल निभाते हुए ज्यादा से ज्यादा हेमा मालिनी के साथ रोमांस करने का मौका मिलेगा यदि तुम ठाकुर बनोगे तो मैं संजीव कुमार को वीरू का रोल दे दूंगा।
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1993 प्रोफेसर की पड़ोसन
1987 राही
1986 कत्ल
1986 काँच की दीवार
1986 लव एंड गॉड
1986 हाथों की लकीरें
1986 बात बन जाये
1985 राम तेरे कितने नाम
1985 ज़बरदस्त
1984 लाखों की बात
1984 मेरा दोस्त मेरा दुश्मन
1984 पाखंडी
1984 बद और बदनाम
1984 यादगार
1983 हीरो
1982 अंगूर
1982 सवाल
1982 सुराग
1982 हथकड़ी
1982 अय्याश
1982 खुद्दार
1982 लोग क्या कहेंगे
1982 नमकीन
1982 श्रीमान श्रीमती
1982 सिंदूर बने ज्वाला
1982 विधाता
1981 दासी
1981 इतनी सी बात
1981 बीवी ओ बीवी
1981 चेहरे पे चेहरा
1981 लेडीज़ टेलर
1981 वक्त की दीवार
1981 सिलसिला
1980 हम पाँच
1980 ज्योति बने ज्वाला
1980 अब्दुल्ला
1980 बेरहम
1980 फ़ौजी पंजाबी फ़िल्म
1980 पत्थर से टक्कर
1980 स्वयंवर
1980 टक्कर
1979 काला पत्थर
1979 गृह प्रवेश
1979 हमारे तुम्हारे
1979 बॉम्बे एट नाइट
1979 घर की लाज
1979 जानी दुश्मन
1979 मान अपमान
1978 त्रिशूल
1978 देवता
1978 मुकद्दर
1978 पति पत्नी और वो
1978 सावन के गीत
1978 स्वर्ग नर्क
1978 तृष्णा
1978 तुम्हारे लिये
1977 मुक्ति
1977 शतरंज के खिलाड़ी
1977 यही है ज़िन्दगी
1977 ईमान धर्म
1977 आलाप
1977 अंगारे
1977 अपनापन
1977 धूप छाँव
1977 दिल और पत्थर
1977 पापी
1977 विश्वासघात
1976 ज़िन्दगी
1976 अर्जुन पंडित
1976 दो लड़कियाँ
1975 मौसम
1975 फ़रार
1975 शोले
1975 आक्रमण
1975 आँधी
1975 अपने दुश्मन
1975 अपने रंग हज़ार
1975 धोती लोटा और चौपाटी
1975 उलझन
1974 कुँवारा बाप
1974 आप की कसम
1974 मनोरंजन
1974 अर्चना
1974 चरित्रहीन
1974 चौकीदार
1974 दावत
1974 ईमान
1974 नया दिन नई रात
1974 शानदार
1973 अनहोनी
1973 अग्नि रेखा
1973 अनामिका
1973 दूर नहीं मंज़िल
1973 मनचली
1973 सूरज और चंदा
1972 परिचय
1972 कोशिश
1972 रिवाज़
1972 सबसे बड़ा सुख
1972 सीता और गीता
1972 सुबह ओ श्याम
1971 अनुभव
1971 एक पहेली
1971 कंगन डॉक्टर सुनील 'सोनू'
1971 मन मन्दिर
1971 पारस
1970 बचपन
1970 दस्तक
1970 देवी
1970 गुनाह और कानून
1970 इंसान और शैतान
1970 खिलौना
1970 माँ का आँचल
1970 प्रिया
1969 बंधन
1969 चंदा और बिजली
1969 धरती कहे पुकार के
1969 ग़ुस्ताखी माफ़
1969 इन्साफ का मन्दिर
1969 जीने की राह
1969 ज्योति
1969 सच्चाई
1969 सत्यकाम
1968 गौरी
1968 अनोखी रात
1968 राजा और रंक
1968 आशीर्वाद
1968 संघर्ष
1968 शिकार
1968 साथी
1966 हुस्न और इश्क
1966 बादल
1966 कालपी
1966 स्मगलर
1966 पति पत्नी

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