गीता दत्त(जनम)

गीता दत्त🎂23 नवंबर 1930,⚰️20 जुलाई 1972,
गीता दत्त
🎂23 नवंबर 1930,
मदारीपुर, बांग्लादेश
⚰️20 जुलाई 1972,
सर एच एन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, मुम्बई
पति: गुरु दत्त (विवा. 1953–1964)
बच्चे: तरुण दत्त, नीना दत्त, अरुण दत्त
पोते या नाती: Nafeesa Memon, गौरि दत्त, करुणा दत्त

भारतीय सिनेमा जगत में प्रसिद्ध पार्श्वगायिका जिसने अपनी दिलकश आवाज़ से लगभग तीन दशकों तक करोड़ों श्रोताओं को मदहोश किया। कालजयी फ़िल्म ‘प्यासा’ के अंत में इस फ़िल्म के गीतों को स्वर देने वाली पार्श्वगायिका गीता दत्त के पति प्रसिद्ध अभिनेता, निर्माता-निर्देशक गुरु दत्त थे।

फ़िल्म जगत में गीता दत्त के नाम से मशहूर गीता घोष राय चौधरी का जन्म 23 नवंबर 1930 को फरीदपुर शहर में हुआ। जब वे महज 12 वर्ष की थी तब उनका पूरा परिवार अब बांग्लादेश में फरीदपुर से मुंबई आ गया। उनके पिता जमींदार थे। बचपन के दिनों से ही गीता दत्त का रुझान संगीत की ओर था और वह पार्श्वगायिका बनना चाहती थी। गीता दत्त ने अपनी संगीत की प्रारंभिक शिक्षा हनुमान प्रसाद से हासिल की।

गीता दत्त को सबसे पहले वर्ष 1946 में फ़िल्म 'भक्त प्रहलाद' के लिए गाने का मौका मिला।गीता दत्त ने 'कश्मीर की कली', रसीली, सर्कस किंग (1946) जैसी कुछ फ़िल्मो के लिए भी गीत गाए लेकिन इनमें से कोई भी बॉक्स आफिस पर सफल नहीं हुई। इस बीच उनकी मुलाकात महान संगीतकार एस. डी. बर्मन से हुई। गीता राय में एस.डी. बर्मन को फ़िल्म इंडस्ट्री का उभरता हुआ
सितारा दिखाई दिया और उन्होंने गीता दत्त से अपनी अगली फ़िल्म 'दो भाई' के लिए गाने की पेशकश की। वर्ष 1947 में प्रदर्शित फ़िल्म 'दो भाई' गीता दत्त के सिने कैरियर की अहम फ़िल्म साबित हुई और इस फ़िल्म में उनका गाया यह गीत 'मेरा सुंदर सपना बीत गया' लोगों के बीच काफ़ी लोकप्रिय हुआ। फ़िल्म 'दो भाई' में अपने गाये इस गीत की कामयाबी की बाद बतौर पार्श्वगायिका गीतादत्त अपनी पहचान बनाने में सफल हो गई।

वर्ष 1951 गीता दत्त के सिने कैरियर के साथ ही व्यक्तिगत जीवन में भी एक नया मोड़ लेकर आया। फ़िल्म 'बाजी' के निर्माण के दौरान उनकी मुलाकात निर्देशक गुरुदत्त से हुई। फ़िल्म के एक गाने 'तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले' की रिर्काडिंग के दौरान गीता दत्त को देख गुरुदत्त मोहित हो गए। इसके बाद गीता दत्त भी गुरुदत्त से प्यार करने लगी। वर्ष 1953 में गीता दत्त ने
गुरुदत्त से शादी कर ली। इसके साथ ही फ़िल्म बाजी की सफलता ने गीता दत्त की तकदीर बना दी और बतौर पार्श्व गायिका वह फ़िल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गई।
दिलों की गहराई तक उतर जाने वाली आवाज़ और गाने के दिलकश अंदाज़ की मलिका गीता दत्त भारतीय फ़िल्म संगीत में पश्चिमी प्रभाव की पहचान थी और वह ऐसी फनकार थी जिन्हें हर तरह के गीत गाने में महारत हासिल थी। गीता दत्त की जादुई आवाज़ सबसे पहले ‘जोगन’ में सुनने को मिली। इस फ़िल्म में उन्होंने मीरा के आर्त्तनाद को उंडेलकर श्रोताओं को विरही बना दिया है। वे खुलकर गाती हैं- ‘मैं तो गिरधर के घर जाऊँ। घूँघट के पट खोल रे तोहे पिया मिलेंगे।‘ और गीता के पिया उससे नौ साल पहले चले गए। वे गाती रहीं - ‘जोगी मत जा, मत जा...।‘ गीता दत्त ने गुरुदत्त की फ़िल्मों में क्या खूब गाया है।गले से नहीं, एकदम दिल से। उनके मन की बेचैनी तथा छटपटाहट एक-एक शब्द से रिसती मिलती है।फ़िल्म चाहे ‘बाजी’ हो या ‘आरपार’, ‘सीआईडी’हो या ‘प्यासा’, ‘कागज के फूल’ हो या ‘चौदहवीं का चाँद’ उनके स्वर की विविधता का कायल हो जाता है श्रोता। ‘तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले’ (बाजी), ‘बाबूजी धीरे चलना, प्यार में जरा संभलना...हाँ बड़े धोखे हैं इस प्यार में’। सचमुच उन्होंने प्यार में धोखा खाया। फिर भी गाती रहीं - ‘ये लो मैं हारी पिया, हुई तेरी जीत रे।‘‘साहिब बीबी और ग़ुलाम’ फ़िल्म भले ही छोटी बहू यानी कि मीना कुमारी की फ़िल्म रही हो,लेकिन छोटी बहू का दर्द, शिकायत, अकेलेपन की पीड़ा, पति की बेवफाई को गीता की आवाज़ ने परदे पर ऐसा उतारा कि मीना अमर हो गईं। ‘न जाओ सैंया, छुड़ा के बैंया, कसम तुम्हारी मैं रो पड़ूँगी।‘ और मीना के साथ सिनेमाघर के अँधेरे में डूबे हजारों दर्शक रोए। गीता दत्त ने हर तरह के गाने गाए हैं। फ़िल्म ‘बाजी’ के गीत ‘जरा सामने आ, जरा आँख मिला’ में श्रोताओं को उन्मादी स्वर मिलते हैं। ‘भाई-भाई’ का गीत ‘ऐ दिल मुझे बता दे, तू किसपे आ गया है’ सुनकर मन प्रेम की सफलता से भर जाता है। ‘ प्यासा’ की गुलाबो का जीवन संगीत सुनकर मन अतृप्त प्यास में खो जाता है- ‘आज सजन मोहे अंग लगा ले, जनम सफल हो जाए।‘ लेकिन गीता ने जिन्दगीभर जिन्दगी का जहर पिया- ‘कैसे कोई जिए, जहर है जिन्दगी।‘ वह शराब का जहर रोजाना गले के नीचे उतारती रहीं और एक दिन सबको अकेला छोड़कर चली गईं।

वर्ष 1957 मे गीता दत्त और गुरुदत्त की विवाहित ज़िंदगी मे दरार आ गई। गुरुदत्त ने गीता दत्त के काम में दख़ल देना शुरू कर दिया। वह चाहते थे गीता दत्त केवल उनकी बनाई फ़िल्म के लिए ही गीत गाये। काम में प्रति समर्पित गीता दत्त तो पहले इस बात के लिये राजी नहीं हुयी लेकिन बाद में गीता दत्त ने किस्मत से समझौता करना ही बेहतर समझा। धीरे-धीरे अन्य निर्माता निर्देशको ने गीता दत्त से किनारा करना शुरू कर दिया।कुछ दिनों के बाद गीता दत्त अपने पति गुरुदत्त के बढ़ते दख़ल को बर्दाशत न कर सकी और उसने गुरुदत्त से अलग रहने का निर्णय कर लिया। इस बात की एक मुख्य वजह यह भी रही कि उस समय गुरुदत्त का नाम अभिनेत्री वहीदा रहमान के साथ भी जोड़ा जा रहा था जिसे गीता दत्त सहन नहीं कर सकीं। गीता दत्त से जुदाई के बाद गुरुदत्त टूट से गये और उन्होंने अपने आप को शराब के नशे मे डूबो दिया। 10 अक्तूबर 1964 को अत्यधिक मात्रा मे नींद की गोलियां लेने के कारण गुरुदत्त इस दुनियां को छोड़कर चले गए। गुरुदत्त की मौत के बाद गीता दत्त को गहरा सदमा पहुंचा और उसने भी अपने आप को नशे में डुबो दिया।

गीता दत्त के सदाबहार गीत

खयालों में किसी के इस तरह आया नहीं करते (बावरे नैन : 1950)
सुनो गजर क्या गाए (बाज़ी : 1951)
न ये चाँद होगा, न ये तारे रहेंगे (शर्त : 1954)
कैसे कोई जिए, जहर है जिन्दगी (बादबान 1954)
जाने कहाँ मेरा जिगर गया जी (मिस्टर एंड मिसेस 55 : 1955)
जाता कहाँ है दीवाने (सीआईडी : 1956)
ऐ दिल मुझे बता दे, तू किसपे आ गया है (भाई-भाई : 1956)
आज सजन मोहे अंग लगा ले (प्यासा : 1957)
मेरा नाम चिन-चिन चू (हावड़ा ब्रिज :1958)
वक्त ने किया क्या हँसीं सितम (कागज के फूल : 1959)

उन्होंने हिंदी फिल्मों में 1417 से ज़्यादा गाने गाए हैं। इसके अलावा, उन्होंने मराठी, गुजराती, बंगाली, मैथिली, भोजपुरी और पंजाबी समेत कई अन्य भारतीय भाषाओं में गाने गाए हैं। उन्होंने नेपाली सदाबहार फ़िल्म मैतीघर में भी गाने गाए हैं । 
एसडी बर्मन के निर्देशन में गाए गए कुछ गीत :
"मेरा सुंदर सपना बीत गया" ( दो भाई - 1947) 
"वो सपने वाली रात" ( प्यार - 1950)
"तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर" ( बाज़ी - 1951)
मन्ना डे के साथ "आन मिलो आन मिलो" ( देवदास - 1955)।
"आज सजन मोहे अंग लगालो" ( प्यासा - 1957)
"जाने क्या तूने" ( प्यासा - 1957)
मोहम्मद के साथ "हम आप के आँखों में" ( प्यासा - 1957) रफी
"हवा धीरे आना" ( सुजाता - 1959)
"वक्त ने किया क्या हसीं सितम" ( कागज़ के फूल - 1959)
आशा भोंसले के साथ "जानू जानू रे" ( इंसान जाग उठा )।
ओपी नैय्यर के निर्देशन में उनके द्वारा गाए गए कुछ गीत : 
"ज़रा सामने आ" ( बाज़ - 1953)
"बाबूजी धीरे चलना" ( आर पार - 1954)
"ठंडी हवा काली घटा" ( मिस्टर एंड मिसेज '55 - 1955)
"जाने कहाँ मेरा जिगर गया जी" ( मिस्टर एंड मिसेज '55 - 1955)
"जब बदल लहराया" ( छूमंतर - 1956)
"मेरे जिंदगी के हमसफ़र" ( श्रीमती 420 - 1956)
"जाता कहाँ है" ( सीआईडी ​​- 1956)
"ऐ दिल है मुश्किल" (उर्फ "बॉम्बे मेरी जान") ( सीआईडी ​​- 1956), मोहम्मद रफ़ी के साथ
"चोर, लुटेरे, डाकू" ( उस्ताद - 1957)
" मेरा नाम चिन चिन चू " ( हावड़ा ब्रिज - 1958)
"कैसा जादू बलम तूने दारा" ( 12 बजे - 1958)
हेमंत कुमार के निर्देशन में गाए कुछ गीत 
"जय जगदीश हरे" लगभग 1200 ईस्वी में संस्कृत कवि जयदेव द्वारा रचित ( आनंद मठ - 1951) 
"ना जाओ साइयां छुड़ा के बइयां" ( साहिब बीबी और गुलाम - 1962)
तलत महमूद के साथ "कैसे रोको गी ऐसे तूफान को" ( आनंदमठ - 1952)
"मदभरी हैं प्यार की पलकें" ( फैशन - 1957)
"ना ये चांद हो गा" ( शॉर्ट - 1954)
"पिया ऐसो जिया में समाये गयो" ( साहिब बीबी और गुलाम - 1962)
"चले आओ चले आओ" ( साहिब बीबी और गुलाम - 1962)
मदन मोहन का निर्देशन
"ऐ दिल मुझे बता दे'" ( भाई भाई - 1956)
फिल्म अनुभव (1971) के लिए
"मुझे जान नहीं कहो मेरी जान" ( अनुभव - 1971) संगीत: कनु रॉय
"मेरा दिल जो मेरा होता" ( अनुभव - 1971) संगीत: कनु रॉय
"कोई चुपके से आके" ( अनुभव - 1971) संगीत: कनु रॉय
जोगन के कई गाने :
"घूँघट के पट खोल"
"मैं तू गिरधर के घर जाऊँ"
"मत जा मत जा जोगी"
"दाग मग दाग मग डोले नैया"
"मैं तू प्रेम दीवानी"
कुछ बंगाली गाने: 
'शचीमाता गो चार जुगे है' (1950)
बालो (1951) (पंजाबी फ़िल्म): कोठे कोठे आ कुड़िये: संगीत एन दत्ता  : एल साहिर लुधियानवी
'एखन-ओ दुस्तर लज्जा' (1952)
'ई सुंदर स्वर्णाली संध्या' (अस्पताल, 1960; संगीत: अमल मुखर्जी)
'कथा अच्छे तुमी अज असबे (कानू घोष 1960)
'ई मयाबी तिथि' (शोनार होरिन, 1959; संगीत: हेमन्त मुखर्जी )
'तुमी जे अमर' ( हारानो सूर , 1958; संगीत: हेमन्त कुमार)
'निशि रात बंका चांद आकाशे ' ( पृथिबी आमारे चाय, 1957; संगीत: नचिकेता घोष )
'झनक झनक कनक कंकन बाजे' (इंद्राणी, 1958; संगीत: नचिकेता घोष)
'सुंदर, जानो ना की...' (इंद्राणी, 1958; संगीत: नचिकेता घोष)
'निर छोटो क्षी नेई' [हेमंत मुखर्जी के साथ युगल गीत] (इंद्राणी, 1958; संगीत: नचिकेता घोष)
'कांचेर चूरिर छटा' (डाक हरकारा; संगीत: सुधिन दासगुप्ता)
गैर-फिल्मी शैली के कुछ बंगाली गीत:
'कटो गान हरालम तोमार माझे' (संगीत: अनल चटर्जी)
'कृष्णचुरा आगुन तुमी' (संगीत: सुधिन दासगुप्ता)
'एकटु चाओया, एकतु पाओया' (संगीत: सुधिन दासगुप्ता)
'..आय आय मोयनामोटिर गाने' (संगीत: कनु रॉय)

सत्तर के दशक में गीता दत्त की तबीयत खराब रहने
लगी और उन्होंने एक बार फिर से गीत गाना कम
कर दिया। लगभग तीन दशक तक अपनी आवाज़ से
श्रोताओं को मदहोश करने वाली पार्श्वगायिका गीता दत्त ने अंतत: 20 जुलाई 1972 को इस दुनिया से विदाई ले ली।

Comments

Popular posts from this blog

चांद उस्मानी (मृत्यु)

अर्जुन रामपाल (जनम)

पी सी बरुआ(बरुआ)